शब् की बैचैनी भी अब खामोश है,
हर पल बरसता इसमें सन्नाटे का शोर है,
गाठें, जो अब सुलझती ही नहीं,
कितने ही टूटे रिश्तों की उलझती डोर है....
साये से भी उजाले में ही जी भर बातें कर लो,
अँधेरे में वो भी जाने कहीं खो जायेंगे,
यादें, जगी आँखों का ख्वाब ही तो है,
पलकें बोझिल हुई कि ये सपने भी सो जायेंगे....
चेहरे को भी एक नया शौक़ आया है,
गमों को मुश्कुराहट की चादर ओढाकर सुलाया है,
गालों की आज-कल प्यास बढ़ गयी इतनी,
हंसी की शिफारिस पर हर पल आँखों को रुलाया है....
Saturday, March 6, 2010
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7 comments:
kya baat hia miyan......
achanak chahkati subhah .....khamosh kyo gayi hia......dard bhara hia in lafzo mein......
dard hi to hakiqat hai.... baki to sab illusion hai... :)
thanks for comment dood :)
bahut khoob kaha hai :D
:).... thank u HG!!!!!!
abey trein to get back someone :)
@ karthik.... who?????
bahut sundar lekhan ..
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