रास्ते मुड़ते-चलते थक रहे रोजाना,
फासले कम होते ही नहीं मंजिलों से,
शायद वजह यही,
रास्तों को शिकायत रही मंजिलों से,
पर जाने क्यों, अब
मंजिलों को भी शिकायत है मंजिलों से! ???
साहिल के पहलू में महफूज़ मनचली लहरें,
फिर उन्ही लहरों में बिखरते साहिल,
शायद वजह यही,
साहिल को शिकायत रही लहरों से,
पर जाने क्यों, अब
लहरों को भी शिकायत है लहरों से! ???
बादल यूँ ही नहीं बदलते बूंदों में,
बादलों ने अपनी हस्ती मिटाई है,
शायद वजह यही,
बादलों को शिकायत रही बूंदों से,
पर जाने क्यों, अब
बूंदों को भी शिकायत है बूंदों से! ???
ख्वाबो के खुबसूरत आईने में,
बड़ा बदसूरत है हकीक़त का चेहरा,
शायद वजह यही,
ख्वाबों को शिकायत रही हकीक़त से,
पर जाने क्यों, अब
हकीक़त को भी शिकायत है हकीक़त से! ???
सांसे हो रही हर लम्हा गुमशुदा,
धडकनों की तलाश होती नहीं पूरी,
शायद वजह यही,
सांसों को शिकायत रही धडकनों से,
पर जाने क्यों, अब
धडकनों को भी शिकायत है धडकनों से! ???
हर आज कल की याद बनकर आती है,
हर आज कल की याद बनकर रह जाती है,
शायद वजह यही,
हर आज को शिकायत रही कल से,
पर जाने क्यों, अब
कल को भी शिकायत है कल से! ???
मैंने तो सुनी थी हर शिकायत को बड़े गौर से,
पर जाने क्यों, अब भी
हर शिकायत को शिकायत है मेरी शराफत से........
Friday, January 15, 2010
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